मुहब्बत फूल खुशियाँ और दुआएं पोटली भर के
हम अपने घर में यारों बस यही सामान रखते हैं
यही सच में वजह है तन बदन मेरा महकने की
जलाये दिल में तेरी याद का लोबान रखते हैं
मुहब्बत का सफर होता मुकम्मल उनका ही मानो
जो तीखे दर्द में चहरे पे इक मुस्कान रखते हैं
मिलेगी ही नही थोड़ी जगह दिल में कभी उनके
तिजोरी है भरी जिनकी जो झूटी शान रखते हैं
उन्ही की बात होती है उन्ही को पूजती दुनिया
जो भारी भीड़ में अपनी अलग पहचान रखते हैं
गुलाबों से मुहब्बत है जिन्हे उनको ख़बर कर दो
चुभा करते वो कांटे भी बहुत अरमान रखते हैं
बहारों के ही बस आशिक़ नहीं ये जान लो
खिजां के वास्ते भी दिल में हम सम्मान रखते हैं
Tuesday, May 27, 2008
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